मगध यूनिवर्सिटी की यथा-कथा | पार्ट-3 पेंडिंग रिजल्ट…

पिछले कई सालों से लेट लतीफ के लिए चर्चा में रहे मगध यूनिवर्सिटी ने एक तो समय से अत्यधिक समय लेकर एक बैच के छात्रों को ग्रेजुएशन पूरा करवाया, फिर भी सभी छात्रों का नतीजा अभी तक नही घोषित किया गया चाहे वो कोई माध्यम हो online या offline.

इसमे बेचारे छात्रों का क्या क़सूर था, पहले से मान्यता प्राप्त कॉलेजों में दाखिला करवा लिया उसके बाद जब सरकार ने इनके कॉलेजों की मान्यता रद्द कर दी तो इसमें कसूरवार कौन है कॉलेज, सरकार या छात्र? जब कॉलेज आपकी आदेशों को फुलफिल नही कर रही तो सरकार सजा छात्रों को क्यों दे रही है? क्यों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है? अगर सरकार को कॉलेजों की मान्यता रद्द करनी थी तो उससे 3 साल पहले छात्रों को बता देते। और जब सरकार ने सभी छात्रों की परीक्षा ले ही लिया तो अब रिजल्ट लटकाकर छात्रों के भविष्य खेलने का क्या मतलब।

एक मित्र मगध यूनिवर्सिटी की यथा-कथा बताते हुए लिखते हैं

#मगध यूनिवर्सिटी पार्ट-3 की पेंडिंग रिजल्ट अभी तक नही आया है
क्या ये बात सरकार को नही पता कि वो कितने बच्चों के भविष्य से खेल रही है, या मगध यूनिवर्सिटी को नही पता की उन बच्चों का क्या होगा जिनका रिजल्ट को लगातार टाला जा रहा है।
और ये जो वोट वोट करने कुछ दिन पहले आये थे, और जीतकर चले गए उनकी आंखों में किसी ने अल्कोहल डाल दिया है क्या की जिन युवाओं के बल पर वो आज जनप्रतिनिधि बने उन युवाओं के भविष्य खतरे में है यह नही नजर आ रहा है।
युवाओं का देश कहा जाने वाला भारत मे युवाओं के भविष्य से खेलवाड़ हो रहा है,जो सरकार को नजर नही आ रही है।
और क्यों नजर आए भविष्य, उनके अपने बेटा बेटी का भविष्य तो सेट हो गया है ना।
लगता है 1974 वाली क्रांति की फ़िर से जरूरत पड़ गई है, क्योंकि वो बच्चे अब क्या करेंगे जिनका रिजल्ट के कारण कई नौकरी छूट गई, पोस्ट ग्रेड्यूएट में नामांकन नही हो पा रहा,आखिर वो करेंगे क्या?
उनके माँ बाप इस इंतजार में हैं कि इस बार मेरे बेटे की नौकरी लग जायेगी, तो अगले साल फुस के घर से पक्के का घर बना लेंगे, लेकिन ये AC में रहने वाले राजनेताओं और राजनायिकों को इन बातों से क्या फर्क पड़ने वाला।
और क्या फर्क पड़ेगा जब कुछ बच्चे सूसाइड ही कर लेंगे तो, सरकार तो नही न गिर जाएगी, हां वो फुस का मकान अगले बारिस में जरूर गिर जाएगा,
उस माँ बाप का उम्मीद जरूर ढह जाएगा।
खैर कुछ विद्यार्थी भी ये पढ़कर ये सोच रहे होंगे कि इससे मेरा क्या लेना देना, मेरा तो रिजल्ट आ गया है।।।
दोस्तों कब तक सोओगे, अब वक्त सोने का नही है अंधे बहरे गूंगे सरकार को ये दिखाने का है कि युवाओं में क्या ताकत होती है, और ये क्या क्या कर सकती है।

बाकी आपलोग तय करो कि क्या करना है।।

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