मगध से कोसो दूर से मगध अउ मगही के विकास लगी लड़ाई लड़ैत हथीन पारस सिंह

मगही में एगो कहावत हे “लोटा अउ बेटा बहरहिं में चमकअ हे” बाकी जब रोजी रोटी ला गांव-घर से दूर गेल बेटा जदी अपन गांव-जेबार अउ भाषा -संस्कृति के चमकाबे में लग जा हे त उ बेटा खाली एगो परिवार के न बाकी उ पूरा समाज आउ उ संस्कृति में जिये बालन के बेटा अउ उद्धारक बन जाहे, अइसने एगो बेटा के नाम हे पारस सिंह,

ई मगध से दूर रहके भी एक दशक से मगध के विकाश अउ मगही के सबिधानिक दर्जा के लड़ाई लड़ रहलन हे, पारस सिंह तो बिहार के नवादा जिला के पौरा के रहबैया हथन, जे आज से कय बछड़ पहले बैंक में नौकरी करे लेल कलकत्ता चल अईलन पर इनकर जेहन में अप्पन जन्मभूमि मगध अउ मातृभाषा मगही लेल प्यार कम न होल,बाकि इनकर हिरदा में मगही अउ मगध के प्रेम जे कश्मीर के बर्फ लेखा जम गेल हल, मैथली के आठवी अनुसूची में शामिल होते फिन उबले लगल अउ ई कलकत्ता में ही मगहियन के जौर करे के बीड़ा उठा लेलन,


कलकत्ता के गली-चौराहा यहां तक कि अपन बैंक में आबे बालन गाहक जे मगहिया रह हलन उनकरा से मगही और मगध के चर्चा होबे लगल इहि बीच 2009 में कलकत्ता में रह रहलन मगहियन से मिल के एगो सं गठन ने नेव रखलन मगध नागरिक सेवा संघ अउ लग गेलन वहीं कलकते से मगध अउ मगही के अधिकार के लड़ाई में, बाद में तकनीकी दिक्कत आयल त 2011 में संगठन के नाम बदल के मगही मगध नागरिक संघ  के नाम से पंजीकरण भी करा लेलन ओकर बाद ई पहला  अइसन संगठन बनल जे मगध के बाहर से मगध और मगही के आठवीं अनुसूची में शामिल करें लेल अपन धरना पहिल बेर 2014 में दिल्ली के जंतर मंतर पर देलक अउ तब से लगातार अलग अलग मांग जे मगध के हित में हल ओकरा लेल अपन आवाज बुलंद कर रहलन हे, चाहे मगध क्षेत्र में रेलवे लाइन बिछवे के हो,चाहे मगध से देश के अलग-अलग शहर जाय लेल रेलगाड़ी चलबे लेल या फिन दशरथ मांझी के नाम पर डाक टिकट जारी करबे लेल,मगध अउ बिहार के सबसे बड़ पूजा छठपूजा के पहचान दिलबे के मगही मगध नागरिक संघ अप्पन आवाज उठबैत रहल हे जेकर रिजल्ट भी दिख रहल हे।

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