मगध की शान हुआ करती टेकारी का किला, अब आस-पास के लोग शौच के लिए कर रहे हैं इस्तेमाल

ब्रिटिश राज के दौरान टेकारी के राजा महाराज गोपालसरण थे जो की भूमिहार जाती के थे. गया जिला स्थित ऐतिहासिक महत्व वाले टिकारी किला के जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है और लोग इसे शौच के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं. दक्षिण बिहार में, कई समुदायों के प्रतिनिधि टेकारी परिवार थे, जिनकी महान संपत्ति, टेकारी राज, गया में 18 वीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में थी. जिला स्थित ऐतिहासिक महत्व वाले टिकारी किला के जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है और लोग इसे शौच के लिए भी इस्तेमाल में ला रहे हैं.

मुगल काल में, टेकारी एक समृद्ध संपत्ति के रूप में विकसित हुईं, जो ज़िम्मेदार राजाओं द्वारा संरक्षित थी, टिकारी राज के अंतिम राजा कैप्टन गोपाल शरण सिंह इतिहास के पन्नों में तो द़फन हो चुके हैं, लेकिन खंडहर में तब्दील होने के बावजूद टिकारी राज आज भी अपनी प्राचीनतम भव्यता का अहसास हर किसी को कराता है. टेकारी साम्राज्य का शाही प्रतीक एक पेड़ के पर्च पर बैठे ईगल पर एक कबूतर पर हमला करता था ,टिकारी किला.

किला को संरक्षित करने का प्रयास आजादी के तुरंत बाद से किया जाता तो आज इसकी यह दुर्दशा नही हुई होती. विभाग ने इसके विकास और सौंदर्यीकरण का बीड़ा भी उठाया है. इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पुरातत्व विभाग ने अगस्त के प्रथम सप्ताह में एक पांच सदस्यीय टीम से निरीक्षण भी करावाया है. वहीं आज हालत ये है कि टिकारी किले के चारों तरफ अतिक्रमण और शौच करते हुए व्यक्ति नजर आते हैं.
किले के चारों तरफ की दीवारें गिर चुकी हैं. किला को सात आना और नौ आना में बाटकर नौ आना भाग को सुरक्षित स्थल घोषित कर सात आना को इसमें शामिल नही करने पर आश्चर्य प्रकट करते हुए इसे सुनियोजित साजिश का हिस्सा कर दिया।

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