बुद्ध के काल से भी पुराना है माँ तारा का यह प्रसिद्ध मंदिर । आइये जाने अनछुई बातें

दर्शन करें गया के टिकारी के एक गाँव केसपा मे स्थित माँ तारा की प्रसिद्ध मंदिर की

महर्षि कश्यप मुनी ने केसपा गांव के पास एक मंदिर बनाये थे, यह मंदिर बौद्ध वास्तुकला में अद्वितीय है और कई संस्कृतियों का एक वास्तुशिल्प समामेलन है। माँ तारा मंदिर एक उच्च और व्यापक प्लिंथ पर खड़ा है और इसमें एक उग्र पिरामिड स्पिर, स्क्वायर क्रॉस-सेक्शन और 2 छोटे स्पीयर हैं। मुख्य मंदिर, मंदिर में स्थायी रूप से माँ तारा की एक काला छवि है, जो ज्ञान को दर्शाती है, जिसमें इंडु लोरेस में पौराणिक महत्व है।

केसपा नाम कश्यपा का अपभ्रंश हैं. यहां कभी कश्यप मुनि रहा करते थे. यहां उनका आश्रम था. इस स्थान को तब कश्यप मुनि की वजह से कश्यपा कहा जाता था. बाद में कश्यपा नाम धीरे-धीरे केसपा में तब्दील हो गया.

केसपा गांव के इस पौराणिक मंदिर में मां तारा विराजती है. चमत्कार देखिए. यहां माता का एक हवनकुंड है। इस हवनकुंड में पूरे नवरात्र रोज दस-दस, बीस-बीस मन हवन सामग्री हवन की जाती है, पर मनों भष्म कहां चला जाता है. किसी को कुछ नहीं पता. केसपा गांव के निवासी राहुल शर्मा ने बताया कि मां तारा का यह हवनकुंड कभी नहीं भरता. इस हवनकुंड से राख आजतक कभी नहीं निकाली गई.

राहुल शर्मा कहते हैं कि यूं तो पूरे वर्ष मां तारा के दरबार में दूर-दूर से भक्तों का आना लगा रहता है, पर नवरात्र के मौके पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दूर से साधु और श्रद्धालु यहां पाठ करने और हवन करने आते हैं। राहुल बताते हैं कि इस मंदिर की महिमा की चर्चा बढ़ती ही जा रही है, क्योंकि मां तारा देवी किसी को निराश नहीं लौटाती. यहां मन्नत मांगने और मनोकामना पूरी होने के बाद माता का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती रहती है.

समुद्र मंथन से हलाहल (विष) निकला. पूरे ब्राह्मांड में किसी में सामर्थ्य नहीं था कि इस विष को छू भी लेता. यह विष इतना शक्तिशाली था कि इसके नजदीक जाने भर से देवता और दानव मूर्च्छित हो रहे थे. पूरे ब्राह्मांड में हाहाकार मच गया कि बस प्रलय आ ही चुका है. अभी और इसी समय इस सृष्टि का अंत हो जाएगा, पर तभी भोलेनाथ महादेव शिव शंकर आगे आए और जगत की रक्षा के लिए विष से भरा घड़ा उठा लिया. फिर देखते ही देखते पूरा विष पी गए. विष पीते ही शिव का गला नीला हो गया और स्वयं महादेव भी मूर्च्छित हो गए. अब क्या होगा. चारों ओर हाहाकार. महादेव को क्या हो गया. तभी प्रकट हुईं मां. हां, मां तारा प्रकट हुईं. माता आईं और छोटे बालक की तरह महादेव को गोद में उठा लिया. फिर मां तारा ने महादेव को अपना दूध पिलाया. दूध पीते ही महादेव की मूर्छा (बेहोशी) टूट गई और महादेव ने मां तारा को प्रणाम किया. इस तरह मां तारा महादेव शिव शंकर की भी मां हो गईं.

बुद्ध के काल से भी पुराना है यह मंदिर

मां तारा की महिमा को बखान करने की शक्ति तो साक्षात मां सरस्वती की कलम में भी शायद ही हो. यह कलीयुग है. कहा जाता है कि कलीयुग में चमत्कार नहीं होते, पर मां तारा की महिमा देखिए. बिहार के गया के टेकारी के केसपा गांव में मां तारा का पौराणिक मंदिर है. यह मंदिर बुद्ध के काल से भी पुराना है, क्योंकि बुद्ध भी यहां आ चुके हैं. यहां खुदाई में बुद्ध की भी छह फीट से भी ऊंची काले पत्थरों से बनी अति दुर्लभ प्रतिमा मिली है.

केसपा में सैकड़ों वर्ष पहले जमीन की खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध के काले पत्थर की अतिदुर्लभ छह फीट से भी ज्यादा ऊंची प्रतिमा मिली थी. कहा जाता है कि भगवान बुद्ध भी केसपा आ चुके हैं और यहां प्रवचन दे चुके हैं. जमीन की खुदाई के दौरान कमल का वह सिंहासन भी मिला है, जिस पर बैठ कर बुद्ध ने यहां के लोगों को प्रवचन दिया था.

आठ फीट ऊंची है मां तारा की प्रतिमा

केसपा मंदिर में मां तारा की पौराणिक मूर्ति आठ फीट से भी ऊंची है। इस मूर्ति के सामने खड़े होकर नवरात्र में जो हाथ जोड़ लेता है, माता उसके सारे दुख हर लेती हैं। मां तारा की मूर्ति पर किसी लिपि में बहुत कुछ लिखा हुआ है, पर इसे आजतक नहीं पढ़ा जा सका है। पुरातत्वविदों को इस मंदिर की दीवारें भी बहुत कुछ बता सकती हैं। यहां की दीवारें चार फीट से ज्यादा चौड़ी हैं।

 

कैसे पहुंचे माँ तारा मंदिर केसपा…

अगर आप हवाई मार्ग से आरहे हों तो आपको गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा या पटना हवाई अड्डे पर लैंड करना पड़ेगा वहाँ से गया रेलवे जंक्शन आना पड़ेगा। यदि आप रेल मार्ग से आरहे हैं तो भी आपको गया रेलवे जंक्शन आना पड़ेगा। जंक्शन के पश्चिमी ओर से बस या तीन पहिया टैक्सी लेना होगा यदि आपको केसपा के लिए सीधा कोई वाहन नही मिल रही हो तो उस स्थिति में आपको टिकारी के लिए वाहन लेना पड़ेगा उसके बाद टिकरी से वाहन बदलना पड़ेगा।

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