गया जंक्शन महिला एसएम के हवाले, बेटियां देखेंगी ट्रेनों का आवागमन।

गया जंक्शन पर दो महिला स्टेशन मास्टरों का योगदान नारी सशक्तीकरण की दिशा में तेजी से बढ़ रहे उस कदम का प्रमाण है, जिसके लिए सरकार “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” के नारे लगा रही है.

रेलवे की सेवा में आने वाली ये दोनों अपने गांवों की पहली बेटी हैं. बुधवार को ही गया जंक्शन पर योगदान देकर यहां की कमान संभालने वाली दीक्षा कुमारी और दिव्या अपने सपनों को साकार करने लक्ष्य के पीछे भागती रहीं. इनके सपने इससे भी आगे के हैं.

गया जिले के परैया प्रखंड के कष्ठा गांव निवासी मधुकर तिवारी की पुत्री पुत्री दीक्षा बताती हैं कि उन्होंने गांव में ही रहकर पढ़ाई की. प्रारंभिक शिक्षा एक प्राइवेट स्कूल से हुई. इसके बाद मैट्रिक की परीक्षा बिरजु विश्वकर्मा हाईस्कूल कष्ठा से पास की. आगे की पढ़ाई के लिए गया स्थित अनुग्रह मेमोरियल कॉलेज में नामांकन लिया और यहीं से स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद अभी गया कॉलेज से इतिहास में पीजी की भी पढ़ाई कर रही हैं. उनके पिता शहर में ही एक प्राइवेट कंपनी में काम करते है. वे बताती हैं कि माता-पिता ने पढ़ाई के प्रति हमेशा प्रेरित किया और हर सहयोग दिया. इसी के बूते यहां तक पहुंच सकी. सपने आगे भी हैं और उस दिशा में प्रयास जारी है. यानी, सफर अभी पूरा नहीं हुआ है. उन्होंने यह कामयाबी गांव में ही पढ़ाई कर हासिल की. सेल्फ स्टडी से ही प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त की, इसके लिए कोई कोचिंग वगैरह नहीं ली थी. वे कहती हैं कि लड़कियों के लिए अवसर बढ़े हैं, हमें इसे गोल में खुद ही बदलना पड़ेगा.

वहीं भोजपुर जिले के पीरो थाना क्षेत्र के नोनार गांव की कुमारी दिव्या भी रेलवे की नौकरी में आने वाली अपनी ससुराल की पहली बहू हैं. नोनार उनकी ससुराल है. उनके पति मनोज कुमार सिंह इजरायल में एक कंपनी में प्लांट मैनेजर हैं. दिव्या ने बताया कि बीटेक करने के बाद वे दिल्ली में आइएएस की तैयारी कर रही थीं. इस दौरान विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी फार्म भर देती थीं. उन्हें इसका थोड़ा सपोर्ट मिला, क्योंकि उनके जीजा भी रेलवे में हैं और पति के परिवार के भी कई सदस्य. दिव्या केंद्र सरकार की नौकरी में जाने की इच्छा रखती थीं. जब इस परीक्षा में उत्तीर्ण हो गई तो नौकरी में आ गई. उनका रेलवे में ही सीनियर सेक्शन इंजीनियर के लिए भी चयन हुआ है. बीपीएसी मेंस की परीक्षा भी दी है. साथ ही एसएससी में भी काउंसलिंग हो गई है. उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाने का है, जिसके लिए तैयारी कर रही हैं. दिव्या की पिछले ही साल तीन दिसंबर को शादी हुई है. उनके पिता प्रो. उमेश कुमार पटना में शक्तिनगर मोहल्ले में रहते हैं. दिव्या कहती हैं कि हम लड़कियों का आत्मविश्वास ही आगे बढ़ाएगा. इसे हमेशा बनाए रखिए.

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