“टिकारी राज की वंशावली” (आभार tekari raj fb page)

टिकारी राज की पहली पीढ़ी ( 1709 सन से 1729 तक )

प्रथम राजा वीर सिंह पिता चौधरी अजब सिंह, राजा वीर सिंह के तीन लड़के हुए

  1. राजा त्रिभुवन सिंह, इनकी जन्म 1709 में और मृत्यु 1736 में
  2. राजा सुंदर सिंह, इनकी जन्म 1711 में मृत्यु 1758 में
  3. कुंवर छतर सिंह इनकी जन्म 1713 में

टिकारी राज की दूसरी पीढ़ी ( शासन सन 1729 से 1736 तक )
राजा त्रिभुवन सिंह के चार पुत्र हुए

  1. राजा फ़तेह सिंह
  2. राजा बुनियाद सिंह
  3. कुंवर बेचू सिंह – यह महावत जंग के युद्ध में मारे गए थे.
  4. कुंवर नेहाल सिंह

B. राजा सुंदर सिंह के एक पुत्र हुए.
1. कुंवर दूलह सिंह, इनकी 18 वर्ष की अवस्था में किसी युद्ध में मृत्यु हो गयी.
बाद में राजा सुंदर सिंह ने अपने बड़े भाई पीताम्बर सिंह के मंझले बेटे बुनियाद सिंह को गोद ले लिए.

C. कुंवर छत्रर सिंह के एक लड़के हुए
1. कुंवर कहर सिंह

टिकारी राज की तिसरी पीढ़ी (शासन सन 1736 से 1763 तक )
राजा फ़तेह सिंह के एक लड़का और एक लड़की हुए

1. कुंवर त्रिलोक सिंह.
कुंवर त्रिलोक सिंह, इनको अपने पिता राजा फ़तेह सिंह और चाचा राजा बुनियाद सिंह के साथ मीर कासिम ने ५ अक्टूबर १७६३ को मुंगेर के किला में हत्या करवा दिया था. मुंगेर में राजा फ़तेह सिंह के हत्या हो जाने के बाद उनकी विधवा रानी लगन कुंवर ने नेहाल सिंह के बड़े लड़के पीताम्बर सिंह को गोद ले ली थी.
2. एक लड़की इनकी मृत्यु सन १८२७ में हुई. इनसे एक पुत्र रघु नंदन सिंह नाम से हुए.

राजा बुनियाद सिंह के एक पुत्र हुए
1. राजा मित्रजीत सिंह,

कुंवर बेचू सिंह के दो लड़के हुए.
1. कुंवर दलाल सिंह – निसन्तान
2. कुंवर प्रीतम सिंह – निसन्तान

कुंवर नेहाल सिंह
1. राजा पीताम्बर सिंह—- मकसूदपुर स्टेट के प्रथम राजा.
2. कुंवर चैन सिंह
3. कुंवर मैंन सिंह

कुंवर कहर सिंह के दो लड़के हुए.
1. राजा दुंद बहादुर सिंह
2. कुंवर दलेल सिंह.

टिकारी राज की चौथी पीढ़ी (शासन सन 1763 से 1840 तक )

राजा पीताम्बर सिंह — मकसूदपुर राज के राजा बन गए थे इसलिए इनके वंशावली हैं, अलग से पोस्ट किया जायेगा.

राजा मित्रजित सिंह के तीन लडके और तीन लड़कियां हुई.

इनका शासन सन 1765 से 1840 तक रहा, इनका शासन काल सबसे लम्बा 75 वर्ष का रहा था, इन्होने अपने जीवन काल में 1840 में टिकारी राज को अपने दोनों लड़कों बड़े लड़के हितनारायण सिंह (टिकारी राज नौ आना) और छोटे लड़के मोद्नारायण सिंह (टिकारी राज सात आना) के बीच बाँट दिया था.
1. राजा हित नारायण सिंह, राजा नौ आना
2. राजा मोद नारायण सिंह, राजा सात आना
3. राजा खान बहादुर ( दूसरी पत्नि रानी बरसाती बेगम )
लड़कियां
1. राजकुमारी राजेश्वरी कुंवर
2. राजकुमारी ………………. नाम नहीं मालुम
3. राजकुमारी शिव रत्न कुंवर

कुंवर चैन सिंह
1. कुंवर राम सिंह,
2. कुंवर विश्राम सिंह

कुंवर मैन सिंह
1. कुंवर लाल नारायण सिंह
2. कुंवर देवपति नारायण सिंह

राजा दुंद बहादुर सिंह – महाराजा सुंदर सिंह टिकारी राज में प्रशासन एवं सैन्य संचालन में काफी वयस्त थे इसलिय उन्होंने अपने छोटे भाई छतर के पौत्र तथा कहर सिंह के पुत्र दुंद बहादुर सिंह को सन १७५३ में अपना टिकारी राज का प्रतिनिधि मुर्शिदाबाद में बहाल कर दिया. राजा दुंद बहादुर ने टिकारी राज के प्रतिनिधि के रूप में बंगाल के नवाब के दरबार में रह कर कई वर्षों तक वहां अपनी सेवा दी. बंगाल के राज दरबार में कई वर्षों से रहने के दौरान दुंद बहादुरसिंह का मीर कासिम से काफी घनिष्ठता हो गयी थी. इसी समय बंगाल के नवाब मीर कासिम ने टिकारी राज से राजा फ़तेह सिंह, राजा बुनियाद सिंह और फ़तेह सिंह के पुत्र नवालिग़ त्रिलोक सिंह को मुंगेर की अपनी किला में धोखा से बुला कर उनलोगों किला में बंदी बना कर निर्मम हत्या करवा दी. टिकारी के राजा के हत्या करने के बाद बंगाल के नवाब मीर कासिम के आदेशानुसार टिकारी राज के राजा दुंद बहादुर सिंह ६ अक्टूबर १७६३ को बनाये गए, जो २२ अक्टूबर १७६४ तक अंग्रेज से मीर कासिम के हारने तक दुंद बहादुर सिंह राजा बने रहे, मीरकासिम के सुबेदारी समाप्त होने के कारण दुंद बहादुर सिंह की टिकारी राज प्राप्त करना, यह सब सिर्फ कागजी रह गया क्योंकि राजा रहते हुए भी दुंद बहादुर सिंह टिकारी राज के गद्दी पर कभी भी नहीं बैठ पाए थे. इनके कोई लड़के नहीं हुए.

कुंवर दलेल सिंह- इनके लड़के के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

टिकारी राज की पांचवी पीढ़ी

इस पीढ़ी में टिकारी राज दो भाग में बट गया- टिकारी राज नौ आना और टिकारी राज सात आना

टिकारी राज की पांचवी पीढ़ी और टिकारी राज नौ आना की पहली पीढी (शासन 1840 से 1861 तक )

राजा हित नारायण सिंह

राजा हित नारायण सिंह के कोई लड़के नहीं हुए इसलिए उनके पत्नी रानी इन्द्रजीत कुंवर ने अपने भाई के लड़के (रुसी एस्टेट ) को गोद ले ली

दत्तक पुत्र
राम नारायण किशन सिंह उर्फ़ किशुन सिंह

टिकारी राज सात आना
टिकारी राज की पांचवी पीढ़ी और टिकारी राज सात आना की पहली पीढी (शासन 1840 से 1857 तक )

राजा मोद नारायण सिंह

राजा मोद नारायण सिंह के दोनों हिन्दू पत्नियों से कोई संतान नहीं थी. इसलिए उन्होंने अपने चचेरे भाई बिशुन सिंह उर्फ़ बिश्राम सिंह के लड़का रन बहादुर सिंह के गोद ले लिए थे.
रन बहादुर सिंह

मुस्लिम बैराती बेगम से दो लड़का और दो लड़की हुए.
– साहेबजादी शैरिफुन्निस्सा
– साहेबजादा इकबाल बहादुर
– साहेबजादा हिम्मत बहादुर
– साहेबजादी बिस्मिल्ला बेगम
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कुंवर राम सिंह के एक लड़का हुए
कुंवर बिक्रमजीत सिंह

कुंवर बिशुन सिंह उर्फ़ बिश्राम सिंह के एक लड़के हुए
रन बहादुर सिंह इनको राजा मोद्नारायण सिंह ने गोद ले लिया था.

कुंवर लाल नारायण सिंह- निसन्तान हुए

कुंवर देवपति नारायण सिंह के दो लड़के हुए
1. कुंवर करोड पति नारायण सिंह
2. कुंवर कमलापति नारायण सिंह

टिकारी राज की छठी पीढ़ी

टिकारी राज की छठी पीढ़ी और टिकारी राज नौ आना की दूसरी पीढी (1861 से 1884 तक)

राजा राम नारायण किशन सिंह उर्फ़ किशुन सिंह के एक लड़की हुई –

राधेश्वरी कुंवर उर्फ़ किशोरी मैइयां
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टिकारी राज सात आना
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टिकारी राज की छठी पीढ़ी और टिकारी राज सात आना की दूसरी पीढी (1857 से 1890 तक )

राजा रन बहादुर सिंह के एक लड़का और एक लड़की हुई.-

राजकुमार नारायण सिंह के एक पुत्री राजकुमारी रत्ना कुंवर उर्फ़ ननको साहिबा.
राजकुमार मुरलीधर सिंह – निसंतान

टिकारी राज की सातवी पीढ़ी

टिकारी राज की सातवी पीढ़ी और टिकारी राज नौ आना की तीसरी पीढी (1884 से 1930 तक)

रानी राधेश्वरी कुंवर उर्फ़ किशोरी मैइयां के एक पुत्र और एक पुत्री हुई

महाराजा गोपाल शरण सिंह

पुत्री का नाम नहीं मालूम है, उनकी शादी तुमकुही स्टेट के राजा खरग बहादुर सिंह से हुई थी.

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टिकारी राज सात आना
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टिकारी राज की सातवी पीढ़ी और टिकारी राज सात आना की तीसरी पीढी (1890 से 1895 तक )

राजा नारायण सिंह के एक लड़की हुई
रानी रत्ना कुंवर उर्फ़ ननको साहिबा

टिकारी राज सात आना की आठवी पीढ़ी और टिकारी राज सात आना की चौथी पीढी (1895 से 1952 तक )

रानी रत्ना कुंवर उर्फ़ ननको साहिबा से एक लड़की हुई

रानी भुवनेश्वरी कुंवर

टिकारी राज की विस्तृत वंशावली अलग से दिया जायेगा.

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