नयी G.S.T दरों से घर चलाना आसान, लेकिन घर बनाना होगा मुश्किल, जानें क्या हुआ सस्ता-क्या महंगा

G.S.T काउंसिल की 23वीं बैठक को लेकर काउंसिल के अहम सदस्य सुशील कुमार मोदी ने आज बड़ा एलान किया है। मोदी ने कहा है कि पहले जिन 227 उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता था, अब नयी व्यवस्था के तहत उनमें मात्र 50 उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। शेष 177 वस्तुओं व उत्पादों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। GST काउंसिल के इस फैसले से आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी और उनका मासिक बजट कम होगा।

सुशील मोदी ने काउंसिल की बैठक में भोजनावकाश के दौरान ये बातें मीडिया से कहीं हैं। हालांकि इस संबंध में औपचारिक एलान शाम छह बजे के बाद किया जायेगा। ध्यान रहे कि सुशील कुमार मोदी बिहार के डिप्टी सीएम व वित्तमंत्री हैं और वे जीएसटी-एन के प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि जिन 50 उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी स्लैब जारी रहेगा, वे ज्यादातर लक्जरी प्रोडक्ट । गैर जरूरी और अहितकर चीजों भी इसमें शामिल की गयी हैं। सुशील कुमार मोदी ने कहा कि च्वींगम, चॉकलेट, आफ्टर सेव क्रीम, वाशिंग पाउडर, डिटर्जेंट, मार्बल पर 18 प्रतिशत GST लगेगा। इन पर पहले GST के तहत 28 प्रतिशत टैक्स लगता था। मोदी ने कहा, 28 प्रतिशत कर स्लैब में 227 वस्तुएं थी। फिटमैंट समिति ने इसमें वस्तुओं की संख्या घटाकर 62 करने की सिफारिश की थी जबकि GST परिषद ने इससे भी आगे बढकर 12 और वस्तुओं को इसके दायरे से हटाने का फैसला किया है।

 

सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सभी तरह की च्युइंगम, चॉकलेट, फेशियल मैकअप तैयारी के सामान, शैविंग व शैविंग के बाद काम आने वाले सामान, शैंपू, डियोडोरेंट, कपडे धोने के डिटरजेंट पाउडर व ग्रेनाइट व मार्बल पर अब 18 प्रतिशत दर से जीएसटी लगेगा।

इस बात पर सहमति थी कि 28 प्रतिशत श्रेणी में केवल अहितकर व गैर जरूरी सामान ही होंगे। इसलिए आज GST परिषद ने ऐतिहासिक फैसला किया कि 28 प्रतिशत जीएसटी दर में केवल 50 वस्तुएं ही होंगी। इस स्लैब से हटायी गयी बाकी वस्तुओं पर कर दर को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। रंग रोगन व सीमेंट को 28 प्रतिशत कर दायरे में ही रखा गया है। वाशिंग मशीनों व एयर कंडीशनर जैसे लग्जरी उत्पादों को 28 प्रतिशत जीएसटी दायरे में रखा गया है। GST परिषद के आज के फैसले का राजस्व पर असर 20,000 करोड रुपये सालाना होगा।

सुशील मोदी ने कहा, इस बात पर सहमति थी कि 28 प्रतिशत स्लैब को धीरे-धीरे 18 प्रतिशत पर लाया जाए. लेकिन इसमें समय लगेगा क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर बड़ा असर होगा.

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