गया दर्शन 11: आस्था और विश्वास का केन्द्र है ये कोंचेश्वर नाथ मंदिर।

गया के लगभग 47 KM दूर पश्चिम की ओर कोंच प्रखंड में यह प्रसिद्ध कोंचेश्वर नाथ मंदिर आस्था और विश्वास का केन्द्र है। यह कोंचेश्वर नाथ मंदिर अपने आप में एक दर्शनीय स्थल के रूप तो विख्यात है। 

मान्यताएं के अनुसार यहां मन्नत मांगने से सारे मनोकामनाएँ पूरे हो जाते है। वहीं, इस मंदिर में हर वर्ष सावन मास के हर सोमवार को तो हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करते है।

यह मंदिर गया जिला मुख्यालय से 47 किलोमीटर दूर पश्चिमोत्तर सीमा पर कोंच प्रखंड मुख्यालय के कोंचडीह नामक स्थान पर अवस्थित है। यह मंदिर 80 फुट ऊंचा और 32 फुट चौड़ा है। इसके सामने एक बड़ा सा तालाब है। इस मंदिर में शिवलिंग के अलावा भगवान विष्णु, हर-गौरी, रामकृष्ण, दशावतार सहित लगभग 25 अन्य दुर्लभ मूर्तियां मंदिर के समीप सभा भवन में मौजूद है। इस मंदिर को भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग द्वारा वर्ष 1996 ई में राष्ट्रीय स्मारक की सूची में शामिल कर ली है। यह मंदिर आज भी लोगों का आस्था और विश्वास का अटूट केन्द्र है। लोगों का मानना है कि जो भी श्रद्धालु मन्नत मानते हैं उसे कोंचेश्वर महादेव पुरा करते हैं।

इस मंदिर की स्थापना व अन्य बिंदुओं को लेकर इतिहासकारों का है अलग-अगल राय है। इस मंदिर के स्थापना एवं अन्य पहलू को लेकर इतिहासकर और पुरात्तव विभाग में काफी मतभेद है। कुछ पुरात्तव वेदिक इसे पाल काल के बताते है, तो कुछ वैदिक कालीन के बताते है। कई इतिहासकार का मानना है कि कोंचेश्वर नाथ मंदिर बौद्धकाल की सांस्कृतिक गतिविधियों का एक हिस्सा है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा के वृतांत में विस्तृत तौर पर चर्चा की है। इतिहासकारों के अनुसार मंदिर के उपर कलाकृति से यह अनुमान लगाया गया कि उड़ीसा राज्य के भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर से इसकी कलाकृति मिलती जुलती है। डॉ. डीआर पाटील के द्वारा लिखित पुस्तक में कहा गया है कि कोंच गांव में एक राजा थे, जिसके शाशनकाल में कोंच ग्राम में 52 मंदिर और 52 तालाब थें। उस समय सिद्धलिंग के रूप में कोंचेश्वर मंदिर काफी प्रसिद्ध था। इसी मंदिर के नाम पर कोंच गांव का नामकरण किया गया। बताया जाता है कि श्री गुरू शंकराचार्य ने मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी। बगल में है सहस्त्रलिंग महादेव की प्रतिमा
मंदिर में पड़े शिलालेखों पर प्राकृत भाषा का प्रयोग है। मंदिर के समीप तालाब के खुदाई से कई दुर्लभ और प्राचीन मूर्तियां भी मिली है।

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